‘एडमिशन से पहले’

स्कूल एक ऐसी जगह है, जहां बच्चा अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण डेढ़ दशक, तकरीबन 15 साल का समय गुजारता है. ऐसी स्थिति में अगर आप अपने बच्चे का किसी स्कूल में एडमिशन कराना चाहते हैं तो आपको कुछ बातें बिल्कुल सीधे तौर पर खुद से पूछनी चाहिए और उसके बारे में जानकारी इकट्ठी करनी चाहिए.
यकीन मानिए स्कूल से ही आपके बच्चे का भविष्य तय होने वाला है. तो आइए देखते हैं कुछ प्रश्नों को, जिन्हें अपने बच्चे का दाखिला कराने से पहले आपको ध्यान देना चाहिए-

स्कूल कितना फ्यूचर रेडी है?

बेशक आज के समय आप अपने बच्चे को किसी भी स्कूल में डाल रहे हों, लेकिन आने वाले दिनों में स्कूल और उसका करिकुलम कितना अधिक विजनरी है, यह देखना आपके लिए बेहद इंपॉर्टेंट है. इसमें वहां के टीचिंग मेथड्स, टेक्नोलॉजी से अपग्रेडेशन, आने वाले समय के सोशल और एम्प्लॉयमेंट चैलेंज इत्यादि के ऊपर वहां के प्रबंधन का ध्यान कितना है, यह जानना महत्वपूर्ण है.
इसी प्रकार एकेडेमिक्स प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स के लिए अपनाए जाने वाले मेथड्स क्या हैं, इसे अवश्य जानिये. अगर स्कूल ऑर्थोडॉक्स की तरह रटे-रटाये पैटर्न पर ही चलता है तो आपका बच्चा भविष्य के चैलेंजेज से निपटने में कैसे सक्षम हो पाएगा, इस पर अवश्य ही विचारिये.

टीचर्स कितने स्किल्ड हैं?

यह एक ऐसा प्रश्न है, जो बेहद इंपॉर्टेंट है. मां-बाप के बाद अगर बच्चे किसी से सर्वाधिक प्रभावित होते हैं तो वह टीचर ही हैं. यकीन मानिए इस प्रश्न को पूछते समय और इसकी जानकारी लेते समय आपको जरा भी हिचकना नहीं चाहिए. आप सीधे पूछें कि स्कूल में टीचर्स की क्वालिफिकेशन क्या है, उनका अनुभव क्या है और क्या अपनी स्किल्स को वह टाइम टू टाइम अपडेट करते हैं?
इसका संतुष्टि युक्त जवाब मिलने पर ही अपने अगले कदम के बारे में निर्णय लें.

क्लास रूम के बाहर क्या?

समय बड़ी तेजी से बदला है. क्लासरूम प्रोग्राम अधिकांश स्कूलों में चलता ही है, लेकिन क्लास रूम के अतिरिक्त एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज, जिसमें फील्ड ट्रिप, सोसायटी / कम्युनिटी एक्टिविटीज हो गई, इसको स्कूल कितनी अहमियत देता है. यह आपके लिए ज्यादा इंपॉर्टेंट है. इसमें टेक्स्ट बुक के अलावा प्रोजेक्ट वर्क और हैंड-ऑन एक्टिविटी नए ज़माने में कहीं ज्यादा मायने रखने लगी है.

सेफ्टी

यह बेहद इंपॉर्टेंट और क्रिटिकल फैक्टर बन चुका है. बदलते जमाने में आपको स्कूल्स के साथ सीधे तौर पर यह जानकारी लेनी चाहिए कि स्कूल में सर्विलांस का सिस्टम क्या है? बच्चे को पनिशमेंट देने की क्या पॉलिसी है? टीचर्स बच्चों को डिसिप्लिन में किस प्रकार रखते हैं और प्रैक्टिकल कठिनाइयों से कैसे निपटते हैं?
आप स्कूल के ट्रैक रिकॉर्ड को जांचने में जरा भी हिचकिचाहट ना दिखलाएं. यकीन मानिए यह वह महत्वपूर्ण फैक्टर है, जिसे इग्नोर करना आपको भारी पड़ सकता है.

टेक्नोलॉजी-फ्रेंडली

कहने की आवश्यकता नहीं है कि टेक्नोलॉजी बदलते जमाने की बैकबोन बन चुकी है. ऐसे में आप कंप्यूटर्स और 3डी लैब्स, अर्टिफिकल इंटेलिजेंस के साथ दूसरी टेक्नोलॉजी और स्कूल में उसके एप्लीकेशन को चेक कर सकते हैं. कंप्यूटर की टेक्स्ट बुक की तैयारी पर भी आप नजरें दौड़ा सकते हैं. इसी प्रकार आप देख सकते हैं कि आधुनिक टाइम में तमाम लर्निंग सॉल्यूशंस को स्कूल कितना प्रिफर कर रहा है!

एसेसमेंट (आंकलन)

स्कूल्ज में बच्चे की पढ़ाई को जांचने का तरीका भी आपको समझ लेना चाहिए. स्कूल, क्लास रूम में सिखाई गई चीजों को किस प्रकार से आंकलन करते हैं, क्या वहां सिर्फ एग्जाम का पैटर्न ही चलता है? क्या वहां स्टूडेंट्स को इनकरेज किया जाता है या उनको डिसकरेज किया जाता है, यह समझना ज्यादा इंपोर्टेंट है.

स्टूडेंट टीचर रेशो (अनुपात)

यह एक ऐसा फैक्टर है जो देखने में आपको छोटा लग सकता है लेकिन जिस स्कूल में टीचर और स्टूडेंट का रेशियो ज्यादा रहता है, वहां बच्चे को पर्सनल शिक्षा दे पाना, उस पर ध्यान दे पाना बड़ा मुश्किल होता है. निश्चित रूप से इससे आपके बच्चे की सीखने की क्षमता भी प्रभावित होती है.

पेरेंट्स के प्रति अकॉउंटीबिलिटी

क्या स्कूल में एक ऐसा माहौल है जहां पैरंट के प्रश्नों और फीडबैक पर प्रॉपर संज्ञान लिया जाता है?
इसका इंटरेक्शन का सिस्टम क्या है, इसकी बाबत आपको विधिवत जानकारी लेनी चाहिए.

एथिक्स

स्कूल किस वैल्यू सिस्टम के ऊपर चल रहा है, वहां बच्चों को सोशल होने की क्या शिक्षा दी जाती है और किस प्रकार से उनको है एनकरेज किया जाता है, यह जानना आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है

तो यह कुछ प्रमुख बातें थीं, जो स्कूल में एडमिशन लेने से पहले हर एक मां-बाप को ध्यान देना चाहिए. आप इस बारे में क्या सोचते हैं कमेंट बॉक्स में अवश्य बताएं.

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