भारत के टॉप साइंटिस्ट्स

भारत विकास के रथ पर सवार दिन-प्रतिदिन आगे बढ़ रहा है. एक से बढ़कर एक आविष्कार हमारे देश में रोज हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ पूरी दुनिया मंगलयान और चंद्रयान लांच करने के लिए हमारी तारीफ कर रही है. विज्ञान का शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र शेष है, जिसमें हमने अपनी पकड़ नहीं बनाई हो!

पर क्या आपको पता है कि भारत के वह कौन से मशहूर वैज्ञानिक हैं जिन्होंने हमारे देश की नींव विज्ञान के क्षेत्र में मजबूत की है. आइए जानते हैं…

चंद्रशेखर वेंकट रमन

भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार पाने वाले यह पहले भारतीय वैज्ञानिक थे. उन्होंने लाइट पर गहरा अध्ययन किया और रमन किरण के रूप में विश्व के सामने अपना ज्ञान रखा. रमन-इफेक्ट स्पेक्ट्रम पदार्थों को पहचानने और उनकी परमाणु योजना का ज्ञान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. 1954 ईस्वी में इन्हें भारत रत्न की उपाधि दी गई.

डॉ. होमी जहांगीर भाभा

आज विश्व भर में भारत परमाणु ताकत के रूप में अगर जाना जाता है तो उसकी नींव रखने वाले भारत के परमाणु ऊर्जा के जनक होमी जहांगीर भाभा थे. इन्होंने भारत में भाभा परमाणु अनुसंधान संस्थान और टाटा अनुसंधान संस्थान की स्थापना की. इन्हीं की मेहनत के फलस्वरुप 1974 ईस्वी में भारत ने अपना पहला परमाणु परीक्षण किया.

एस. चंद्रशेखर

एक वैज्ञानिक, एक अध्यापक सुब्रमण्यम चंद्रशेखर को 1983 में फिजिक्स के लिए नोबेल पुरस्कार दिया गया था. डॉ. एस. चंद्रशेखर ने ही श्‍वेत बौने नामक नक्षत्रों की खोज की थी. ग्रहों-नक्षत्रों में इनका शोध आज भी महत्वपूर्ण माना जाता है. उन्होंने खगोल, भौतिक शास्त्र तथा सौरमंडल से संबंधित विषयों पर अनेक किताबों की रचना की.

जगदीश चंद्र बोस

वह भारतीय वैज्ञानिक जिन्होंने दुनिया भर में सबसे पहले विज्ञान की तीन महत्वपूर्ण ब्रांचों पर काम किया. रेडियो और सूक्ष्म तरंगों की प्रकाशिकी पर कार्य करने वाले डॉक्टर बोस के कई कार्यों को अमेरिकी पेटेंट मिला था.

विक्रम साराभाई

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के पिता कहे जाने वाले विक्रम साराभाई का ही यह प्रयास था, जिसकी वजह से आज भारत अंतरिक्ष में गोते लगा रहा है. अंतरिक्ष कार्यक्रम के अलावा आणविक ऊर्जा, इलेक्ट्रानिक्स और अन्य अनेक क्षेत्रों में डॉ. साराभाई का महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है.

डॉ. हरगोविंद खुराना

डॉ. हरगोविंद खुराना चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में जाने-माने नाम रहे हैं. बायोटेक्नोलॉजी के माध्यम से जेनेटिक कोड की भाषा समझने और प्रोटीन संश्लेषण में महारत रखने वाले डॉक्टर हरगोविंद खुराना को 1968 ईस्वी में चिकित्सा विज्ञान का नोबेल पुरस्कार दिया गया था. उन्हें यह पुरस्कार दो अन्य वैज्ञानिकों के साथ संयुक्त रूप से मिला था.

सतीश धवन

मशहूर भारतीय राकेट साइंटिस्ट सतीश धवन भारतीय छात्रों की प्रतिभाओं पर भरोसा करते थे और उनकी दूरदृष्टि का नतीजा यह है कि भारत में अंतरिक्ष कार्यक्रम को गति मिली. सतीश धवन को आईआईएससी में भारत के प्रथम सुपर सोनिक विंड टनल को स्थापित करने का श्रेय दिया जाता है.

शांति स्वरूप भटनागर

देश आजाद होने के बाद वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद यानी सीएसआईआर की स्थापना में शांति स्वरूप भटनागर का महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है. उन्होंने देश भर में और भी कई प्रयोगशालाएं स्थापित करने में अपनी भूमिका का निर्वहन किया.

वेंकटरामन रामकृष्ण

विश्व के गिने-चुने वैज्ञानिकों में शामिल यह वैज्ञानिक केमिस्ट्री में 2009 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया. कोशिका के अंदर प्रोटीन का निर्माण करने वाले राइबोसोम की कार्य प्रणाली क्या होती है, इस पर वेंकटरामन रामकृष्णन का गहरा अध्ययन है.

सत्येंद्र नाथ बोस

इस महान वैज्ञानिक ने अल्बर्ट आइंस्टाइन के साथ मिलकर बोस-आइंस्टाइन स्टैटिक्स की खोज की थी और भौतिक शास्त्र में बोसान और फर्मियान नामक दो अणुओं का नाम इन्हीं पर रखा गया है.

श्रीनिवास रामानुजन

गणित में अपनी खोजों के लिए मशहूर रामानुजन की पूरी दुनिया में ख्याति है. इन्होंने गणित के ऐसे-ऐसे सिद्धांतों को प्रतिपादित किया, जो आज भी बड़े उदाहरण माने जाते हैं.

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम

इस महान हस्ती को भला कौन भारतीय नहीं जानता है?
भारत के मिसाइल मैन कहे जाने वाले डॉक्टर कलाम ने भारत को एक महत्वपूर्ण ताकत बनाने में बेहद महत्वपूर्ण योगदान दिया है. यह न केवल भारत रत्न से नवाजे गए हैं, बल्कि 2002 में भारत के राष्ट्रपति भी बने.

जाहिर तौर पर यह सभी वैज्ञानिक भारत की शान रहे हैं. इस लिस्ट में और भी कई नाम गिनाए जा सकते हैं, जो इस बात के जीते-जागते प्रमाण रहे हैं कि वैज्ञानिकों ने भारत की सेवा करने के लिए किस कदर त्याग किया है!

प्रत्येक विद्यार्थी को इन वैज्ञानिकों से सीख लेनी चाहिए, जिन्होंने भारत में रहकर, भारत का मस्तक विश्व भर में ऊंचा बना रहे, इस हेतु आजीवन प्रयत्न किया.