वह ‘गलतियां’ जिनसे आपका कैरियर पटरी से उतर सकता है

किसी भी तरह की पढाई पूरी करने के बाद कैरियर की चिंता सर्वाधिक अहम हो जाती है. इस बात में रत्ती भर भी संदेह नहीं है कि पूरे मनोयोग से मेहनत करने के बाद ही आपके कैरियर की गाड़ी धीरे-धीरे पटरी पर आ पाती है.

कैरियर को पटरी पर लाना अपने आप में बेहद मुश्किल होता है, किन्तु ज़रा कल्पना कीजिये कि आप कैरियर की राहों पर आराम से चल रहे हों और अचानक से कई सारी कठिनाइयां सामने आने लगे?

  • मसलन, प्रोजेक्ट्स समय से पूरा नहीं हो रहा हो!
  • अपने सहकर्मियों से आपकी खटपट हो रही हो!
  • या फिर उस स्थान पर आपका मन ही नहीं लग रहा हो…

या ऐसी ही दूसरी प्रॉब्लम्स!!

अक्सर जॉब करने का मतलब तमाम लोग यह समझते हैं कि सिर्फ दिए गए टास्क को पूरा करना पर्याप्त है. ऐसे लोगों को तब भारी आश्चर्य का सामना करना होता है जब पूरे मन से कार्य करने के बवजूद इंपैक्ट उस ढंग से नहीं पड़ता है.

नतीजा होता है कि ऐसे लोग कैरियर में ऊंचाइयों को नहीं छू पाते हैं और उस सफलता से महरूम रह जाते हैं, जिनके वह हकदार हैं.
ऐसे में कैरियर में महत्वपूर्ण बिंदुओं को जानना बहुत आवश्यक है, जिनसे आप प्रगति की राह पर आगे बढ़ सकेंगे.

को-वर्कर के साथ रिलेशनशिप

ऑफिस पॉलिटिक्स के बारे में तो आप जानते ही होंगे या नहीं जानते होंगे तो सुना अवश्य होगा. जी हां! आपका काम करना ही पर्याप्त नहीं है, वरन अपने सहकर्मियों के साथ आपका व्यवहार किस प्रकार का है, यह बेहद महत्वपूर्ण है. काम बेशक आप प्रोफेशनल ढंग से करते हैं, किन्तु काम आप जीते-जागते इंसानों के साथ ही करते हैं, ऐसे में उनके साथ प्रोफेशनल ही सही, एक बेहतर और कम्फर्ट देने वाली रिलेशनशिप आपके कैरियर में सहायक सिद्ध हो सकती है.

यह बात सौ फीसदी सच है कि कोई भी कंपनी आपके प्रमोशन का फैसला लेते समय आपकी बेहतर नेटवर्किंग का भी ध्यान रखती है.

ड्रेसिंग सेन्स

क्या आप भी अपने ड्रेसिंग सेन्स को लेकर सजग नहीं रहते हैं?

ध्यान रखिये, यह अत्यंत आवश्यक चीज है.
आप जिस भी प्रोफेशन में हैं, उसमें आपके कपड़ों से लेकर, आपके बाल और आपके जूतों से लेकर दूसरी एसेसरीज बेहद महत्वपूर्ण भूमिका रखती हैं.

कंपनी इस बात को भी ध्यान में रखती है कि आपकी प्रेजेंस से कंपनी में सकारात्मक असर पड़ता है या नकारात्मक! सीनियर पोजिशंस पर तो आप पूरी कंपनी को रिप्रेजेंट करते हैं. ज़ाहिर है कि आप का ड्रेस सेंस बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है.

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पर्सनल और प्रोफेशनल रिलेशन

कंपनी प्रबंधन इस बात से भिज्ञ होता है कि प्रत्येक एम्प्लॉई अपनी व्यक्तिगत परिस्थितियों से बंधा होता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप उस चीज को बार-बार अपने काम के बीच में लाएंगे.
तात्पर्य यह है कि आप कार्य करते समय अपनी पर्सनल चीजों को बिल्कुल ही अलग रखें और प्रोफेशनल वर्क स्ट्रक्चर पर उसका असर ना पड़े, इसे ध्यान में रखें.

कई बार तो लोग व्यक्तिगत परेशानियों की बहानेबाजी भी करते हैं. अगर आप भी इस तरह के लोगों में हैं तो यह आदत तत्काल ही छोड़ दें.
ऐसा अक्सर देखा गया है कि बार-बार व्यक्तिगत चीजों की वजह से कार्य में डिस्टर्बेंस पैदा होने से कंपनी उस व्यक्ति को वरीयता देना कम कर देती है.

अवसर या पैसा?

बिना लाग-लपेट के यह बात समझ लें कि जब काबिलियत आपके पास रहेगी तो पैसा झक मारकर आपके पास आएगा. एक्सपीरियंस और वर्क एक्सपोजर में बढ़ोतरी आपका पहला लक्ष्य होना चाहिए. कई बार आपकी राह में ऐसे अवसर आते हैं, जब ऐसे अवसर उपस्थित होते हैं, तो ऐसे वक्त आपको सावधानी और दूरदर्शिता के साथ निर्णय लेना चाहिए.

हालांकि पैसे की अहमियत से वर्तमान समय में कौन इनकार करेगा, किंतु अवसर की महत्ता कहीं ज्यादा है. वस्तुतः पैसा आपको तात्कालिक लाभ देता है, लेकिन अवसर आपको दीर्घकालीन लाभ देता है. कई बार ठीक निर्णय न लेने से आपका कैरियर डिरेल हो जाता है.

इनीशिएटिव नहीं लेना

क्या आप कार्य शुरू करने से झिझकते हैं? जान लीजिये कि कई बार आपको स्वतः इनीशिएटिव लेना चाहिए.
आपको कैरियर में लगातार प्रोएक्टिव होना पड़ता है. ना केवल इनीशिएटिव लेना होता है, बल्कि कार्य को आगे बढ़ाते हुए उसे पूरा करने की दिशा में लेकर जाना भी आप ही की जिम्मेदारी है.

तो अगर इस दिशा में आप सजग रहते हैं तो आपका कैरियर न केवल पटरी पर रहेगा, बल्कि आगे ही आगे बढ़ता जायेगा.
क्या कहते हैं आप?

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