दिवाली पर कैसे ‘सेफ’ रहेगा आपका बच्चा?

भारत के प्रमुख त्योहारों में दिवाली का नाम गिना जाता है. इस दिन लोग ना केवल धन की देवी लक्ष्मी का पूजन -अर्चन करते हैं, बल्कि पटाखे जलाकर अपनी खुशियों का इजहार भी करते हैं.

पर आपने अखबारों में, टेलीविजन पर कई बार दिवाली के समय होने वाली दुर्घटनाओं के बारे में भी ज़रूर ही सुना होगा जिसमें कई बार जान-माल की भारी हानि होती है. ऐसे में आपको विशेष रूप से सजग होने की जरूरत पड़ती है. खासकर बच्चों के मामले में तो जरा सी भी लापरवाही जीवन भर का कलंक बन सकती है!

आइए देखते हैं कुछ टिप्स जिससे आप इस दिवाली पर अपने बच्चों को सुरक्षित माहौल दे सकते हैं.

कॉटन गारमेंट्स का यूज करें

जी हां, ना केवल बच्चे बल्कि एडल्ट्स को भी कॉटन गारमेंट पहनना चाहिए, क्योंकि सिंथेटिक कपड़े बहुत जल्दी आग के लपेटे में आ जाते हैं. तो अपने बच्चों को कॉटन के कपड़े पहना कर ही दिवाली मनाने दें. यह भी ध्यान देने वाली बात है कि कपड़े बहुत ज्यादा फैले हुए ना हों बल्कि फिटिंग वाले कपड़े होने चाहिए और इससे बच्चे की बाजू और पैर पूरी तरह से कवर होने चाहिए. लड़कियों का दुपट्टा ठीक ढंग से पिन होना चाहिए.

इमरजेंसी नंबर्स, फर्स्ट एड किट व फायर एक्सटिंग्विशर

आपातकाल कभी भी आपको बता कर नहीं आता है!
दुर्घटनाएं तमाम सावधानी रखने के बावजूद भी हो जाती हैं. ऐसी स्थिति में आप उस दुर्घटना से कैसे निपटेंगे, इसका ध्यान आपको होना चाहिए. इसके लिए इमरजेंसी नंबर जिसमें फायर स्टेशन, पुलिस स्टेशन और डॉक्टर इत्यादि का नंबर होता है उसे चेक कर लें और अगर पहले से आपके पास यह नहीं हैं तो इसे अपने फोन में सेव करें.

इसके अतिरिक्त आपके पास फर्स्ट-एड किट रेडी रहनी चाहिए. इसके साथ ही आप जहां रहते हैं वहां पर फायर एक्सटिंग्विशर ठीक ढंग से काम करना चाहिए, ताकि किसी आपात स्थिति में आप खुद को असहाय महसूस ना कर सकें.

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पटाखों को लेकर सावधानी

दिवाली पर बच्चे पटाखे जलाने से खुद को रोक नहीं पाते हैं चाहे उन्हें लाख मना किया जाए, किंतु आप पटाखे की क्वालिटी तो जरूर ही चेक कर सकते हैं और उसे नियंत्रित भी कर सकते हैं.

पटाखे उसी कंपनी का लें जिन्हें इसे बनाने का लाइसेंस मिला हुआ है. बच्चों द्वारा जो पटाखे चलाए जा सकते हैं और जो नुकसानदायक नहीं होते हैं वही पटाखे उन्हें दें ना कि बहुत ज्यादा विस्फोट करने वाले, आवाज करने वाले पटाखों को उन्हें दें.

इसी प्रकार से पटाखे की एक्सपायरी भी होती है. ऐसे में बहुत ज्यादा पुराने पटाखे इस्तेमाल में न लाएं. ध्यान देने वाली बात यह भी है कि कई बार कुछ पटाखे नहीं जलते हैं तो बच्चे उन्हें बार-बार जलाने की कोशिश करते हैं. ऐसे प्रयास से आप उन्हें रोकें. कई बार बारूद धीरे-धीरे आग पकड़ता है और जब बच्चा उसके पास पहुंचता है तभी वह ब्लास्ट हो जाता है.

इसलिए बेहद आवश्यक है कि आपकी देखरेख में ही आपका बच्चा पटाखे इस्तेमाल करें. किसी हालत में इसे अनियंत्रित ना होने दें और तब जाकर कहीं आप सेफ्टी के साथ अपने बच्चों को दिवाली मनाने का आनंद दे सकते हैं.

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