थॉमस अल्वा एडिसन का ‘प्रेरक बचपन’

जब किसी महापुरुष की सफलता की कहानी आप पढ़ेंगे, तब उसमें आप को ऐसा लग सकता है कि उस व्यक्ति ने कोई संघर्ष ही नहीं किया होगा, किंतु सच्चाई इसके एकदम उलट होती है. वह व्यक्ति ना केवल कठिन परिस्थितियों से गुजरता है, बल्कि हाड़-तोड़ संघर्षों की उन राहों से गुजरा होता है जो किसी भी कमजोर व्यक्ति का हौंसला तोड़ने के लिए काफी होती है.

पर यही तो खास बात है ‘खास’ लोगों में और आम लोगों में कि कठिनाइयां जहां आम लोगों का हौंसला तोड़ देती हैं, वहीं खास लोगों का ज़ज्बा और भी मजबूत कर जाती हैं.

इसी कड़ी में आज हम बात करेंगे थॉमस अल्वा एडिसन के बचपन की! वही थॉमस अल्वा एडिसन, जिन्होंने दुनिया को रोशनी देने के लिए बल्ब का आविष्कार किया.
पर क्या आपको पता है कि इसी एडिशन को स्कूल वालों ने स्कूल आने तक से मना कर दिया था?

जी हां बड़ी दर्दनाक कहानी है. आइए जानते हैं…

1847 ईस्वी में अमेरिका के ओहियो स्टेट में एक लड़के का जन्म हुआ था, जो दिव्यांग था. तकरीबन 4 सालों तक वह बोलना नहीं सीख पाया, लेकिन कुछ समय के बाद वह बोलना अवश्य सीख गया.
पर मुश्किल तब आई, जब एक बड़ी बीमारी ने उस बच्चे की सुनने की क्षमता ही खत्म कर दी. जाहिर तौर पर ऐसी स्थिति में वह किसी पागल, सनकी की भांति व्यवहार करने लगे थे.

इसके कई उदाहरण मिलते हैं, जैसे चिड़ियों को उड़ते देखने पर एडिशन के मन में विचार आता था कि चूंकि चिड़िया कीड़े खाती है, तो एडिशन ने सोचा कि शायद कीड़े खाने की वजह से ही चिड़िया उड़ती है!
इसके बाद इसी से संबंधित उन्होंने प्रयोग भी किया, जिसे लोग उनका सनकीपन कहते थे.

इतना ही नहीं, एक बार मुर्गियों को जब अंडों पर बैठते और उन अंडों से चूजों को निकलते देखा तो एडिशन भी अंडों पर बैठ गए, यह मानकर कि उसमें से बच्चे निकलेंगे!
जाहिर तौर पर अंडों को टूटना था और वह टूट गए. इसी के साथ एडिशन के बारे में तरह-तरह की अफवाहें फैलने लगी और लोग उन्हें मंदबुद्धि कहने लगे.

इसका असर उनके स्कूल पर भी पड़ा और महज 3 महीने बाद ही उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया था. इसका कारण उनका व्यवहार और उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी ना होना था.

ऐसी स्थिति में उनकी मां ने कमान संभाली और अपने बेटे के लिए घर में ही स्कूल का वातावरण निर्मित कर दिया. घर में एडिशन की पढ़ाई का सारा इंतजाम उनकी मां ने किया और उन्हीं के मार्गदर्शन में उन्होंने कई परीक्षाएं पास की.

एडिसन बचपन से ही किताबें पढ़ने के शौकीन थे, खासकर विज्ञान से जुड़ी किताबें. मात्र 10 साल की उम्र में उन्होंने अपने मां से पैसे लेकर प्रयोगशाला बनाया. इसके लिए उन्होंने अपना सारा पैसा दांव पर लगा दिया. शुरुआत में तमाम सफल लोगों की भांति उन्हें असफल होना ही था, और वह असफल हुए भी!

ऐसी स्थिति में पैसों की तंगी से जूझने के लिए उन्होंने अखबार बेचना शुरू कर दिया. अखबार बेचकर जो पैसे मिलते थे, उनसे वह प्रयोग की सामग्री खरीदते थे.

इस बीच उनके साथ एक वाकया हुआ. कहीं जाते वक्त एडिशन ने देखा कि एक बच्चा ट्रेन के नीचे आने वाला था तो एडिशन ने उसे बहादुरी से बचाया. उस बच्चे के पिता इससे काफी प्रभावित हुए और उन्होंने एडिशन को टेलीग्राम मशीन चलाना सिखाया. बाद में इस क्षेत्र में वह एक्सपर्ट बन गए और एक स्टेशन पर उन्हें इसकी नौकरी भी मिल गई. ड्यूटी वह रात के समय करते थे और दिन के समय में वह अपने लेबोरेट्री में प्रयोग करते थे.

इसके आगे की कहानी हम सबको पता ही है कि बिजली के बल्ब के अतिरिक्त उन्होंने कई सारे आविष्कार किए थे.

बिजली के बल्ब के आविष्कार की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है. इसके आविष्कार से पहले वह तकरीबन 10 हजार बार फेल हुए थे!

हालांकि वह हारे नहीं और लगातार प्रयत्न करते रहे. अंततः दुनिया को उन्होंने रौशनी की सौगात दी. इसी से संबंधित प्रश्न जब लोगों ने एडिशन से पूछा कि “क्या इतनी बार फेल होने से वह निराश नहीं हुए?”

…तो एडिशन का जवाब अद्भुत था!

उन्होंने बोला कि उन्होंने 10000 ऐसे तरीकों की खोज कर ली है, जिससे बल्ब नहीं बन सकता है!

जाहिर तौर पर इतना कॉन्फिडेंस उसी व्यक्ति में हो सकता है, जिसका दिल-ओ-दिमाग अपने लक्ष्य पर केंद्रित हो. बल्ब के अलावा उन्होंने इलेक्ट्रिक, लाइट, मोशन पिक्चर, साउंड और रिकॉर्डर इत्यादि खोज करके विश्व को लाभान्वित किया.

एडिसन के जीवन के 2 सूत्र थे जो प्रत्येक व्यक्ति, खासकर बच्चों को प्रेरित कर सकते हैं. इसमें वह कहते हैं कि मात्र एक परसेंट (1%) इंस्पिरेशन और 99% मेहनत से कोई भी व्यक्ति जीनियस बन सकता है.

एडिशन कभी भी हार मानने के पक्ष में नहीं रहते थे और लगातार प्रयास करते रहने की प्रेरणा देते थे. जीवन में सब कुछ संभव है, ऐसा विश्वास एडिशन के अंदर कूट-कूट कर भरा था. अपने 84 साल के जीवन में एडिसन ने जितने प्रयोग किये और जितनी खोजें की, वह किसी भी आम तो क्या खास व्यक्ति के लिए भी सपने जैसा ही है. रिकॉर्ड की बात करें तो 1093 पेटेंट एडिशन के नाम से दर्ज हैं, जो उनकी असीम क्षमता का खुला प्रमाण देते हैं.

आप एक स्टूडेंट के तौर पर उनकी इस उपलब्धि को कैसे देखते हैं, कमेंट-बॉक्स में अपने विचार जाहिर करें.

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