दुनिया भर के बड़े ‘पुस्तकालय’

लाइब्रेरी शब्द अब आम जनमानस के लिए थोड़ा आउटडेटेड हो गया है. कारण साफ है, क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक वर्ल्ड में लोग अब पुस्तक और पुस्तकालयों की बजाय इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज पर ही अपना समय व्यतीत करना पसंद करते हैं. पर एक समय था, जब पढ़ने और समझने के लिए लोग लाइब्रेरी का ही रुख करते थे.

वैसे आज भी अगर किसी को डीप स्टडी करनी है तो लाइब्रेरीज के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है. चूंकि इंटरनेट बेशक जानकारियों का खजाना हो, लेकिन जब बात लाइब्रेरीज की होती है तो इंटरनेट आज भी उसकी तुलना में कहीं नहीं ठहरता.

आइए जानते हैं इस लेख में कि दुनिया भर में वह कौन सी बड़ी लाइब्रेरीज हैं और उनकी क्या खासियत हैं…

कांग्रेस लाइब्रेरी, वॉशिंगटन डीसी

इसे दुनिया का सबसे बड़ा पुस्तकालय कहा जाता है. इसमें 16 करोड़ 40 लाख अर्थात 164 मिलियन किताबें हैं और यह किताबें दुनिया भर की 470 अलग-अलग भाषाओं में मौजूद हैं. इस पुस्तकालय में रखी अलमारियों को अगर किलोमीटर में नापा जाए तो इसकी लंबाई 1349 किलोमीटर हो जाएगी. इस पुस्तकालय की शुरुआत 1820 में हुई थी और यह लॉ, एंटरटेनमेंट, म्यूजिक, मैप इत्यादि का सबसे बड़ा कलेक्शन मिलता है. इसे देखने-देखने के लिए समूचे विश्व से प्रत्येक वर्ष 18 लाख से अधिक विजिटर आते हैं, जबकि यहां का कुल स्टाफ 3149 है. इस पुस्तकालय की विशालता का अंदाजा इस बात से ही लगा लीजिए कि मिस्र, इंडोनेशिया, पाकिस्तान और यहां तक कि भारत सहित 60 देशों में इसके ऑफिसेज मौजूद हैं.

लंदन की ब्रिटिश लाइब्रेरी

इस पुस्तकालय की विशालता का अंदाजा आप इस बात से ही लगा लीजिए कि प्रत्येक वर्ष 30 लाख अतिरिक्त पुस्तकें इसमें जुड़ती जाती हैं. वर्तमान में एक आंकलन के अनुसार यहां 15 करोड़ किताबें मौजूद हैं और इसको रखे जाने की अलमारियों की लंबाई नापी जाए तो 650 किलोमीटर से अधिक होगी और प्रत्येक साल इसमें 12 किलोमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की जाती है.
इस लाइब्रेरी का दिलचस्प आंकड़ा यह है कि अगर आप प्रत्येक दिन 5 किताबें देखें तो इस पूरे लाइब्रेरी की सभी किताबों को देखने में आपको 80000 साल लगेंगे. 14 मंजिला बनी इस बिल्डिंग में 1200 लोगों के बैठने और पढ़ने की व्यवस्था है. इस पुस्तकालय में हड्डियों पर लिखी चाइनीस स्टोरी भी मौजूद है, जिसकी एज तकरीबन 3000 साल मानी जाती है.

न्यूयार्क पब्लिक लाइब्रेरी

इस लाइब्रेरी में 5 करोड़ पचास लाख किताबों का कलेक्शन मौजूद है और 2016 में इस लाइब्रेरी में तकरीबन 18000000 विजिटर इसे देखने देखने के लिए आए थे. उन्नीसवीं सदी के तमाम नोवलिस्ट का कलेक्शन इस पुस्तकालय में आपको मिल जाएगा. यहां तक कि पर्ल हार्बर पर जब जापान द्वारा अटैक किया गया था, उस वक्त की किताबें भी इस लाइब्रेरी में छुपा कर रखी गई हैं. इसकी खास बात करें तो यहां चार करोड़ 65 लाख के आसपास रिसर्च पेपर्स मौजूद हैं, जो दूसरी लाइब्रेरी से इसे खास बनाते हैं.

कनाडा लाइब्रेरी (लाइब्रेरी एंड आर्काइव्ज)

इस लाइब्रेरी में 24000000 तस्वीरें और 1 पेटाबाइट से ज्यादा डिजिटल कंटेंट मौजूद है. किताबों की संख्या की बात करें तो 2 करोड़ से अधिक किताबें और 241 किलोमीटर लम्बा गवर्नमेंट और प्राइवेट शाब्दिक रिकॉर्ड का कलेक्शन मौजूद है.
यहाँ ऑडियो वीडियो रिकॉर्डिंग इतनी ज्यादा संख्या में मौजूद है कि अगर प्रत्येक दिन 24 घंटे भी कोई एक व्यक्ति देखे तो 23 हजार दिन से अधिक टाइम लग जाएगा, समस्त कलेक्शन देखने और सुनने के लिए.

रूस स्टेट लाइब्रेरी, मास्को

यह रशिया की नेशनल लाइब्रेरी है और इसकी स्थापना 1862 में हुई थी. 1917 के बाद जब रूसी क्रांति हुई थी, तब इस लाइब्रेरी को एक बार फिर से रिनोवेट और सक्रीय किया गया और यहां वर्तमान में तकरीबन तीन करोड़ 80 लाख से ज्यादा प्रिंट किताबें और रूस के नेशनल डाक्यूमेंट्स रखे गए हैं.

राष्ट्रीय संसद पुस्तकालय, जापान

यह जापान की नेशनल लाइब्रेरी है और 1948 में एस्टेब्लिश की गई थी. इसे राष्ट्रीय डाइट पुस्तकालय के नाम से भी जाना जाता है. इस पुस्तकालय में चार करोड़ 18 लाख से अधिक किताबें, दस्तावेज इत्यादि का कलेक्शन है और 172 किलोमीटर लंबी अलमारियों में 4500000 वॉल्यूम बुक्स रखी गई हैं. 12 मंजिला बिल्डिंग में यह पुस्तकालय बनाया गया है, जिसमें 8 तल जमीन के अंदर तो मात्र चार तल जमीन के ऊपर मौजूद हैं. इस लाइब्रेरी में 150 से अधिक देशों का ऑफिशियल गजट, अदालत की रिपोर्ट्स, विभिन्न संधियां, विधियां इत्यादि मौजूद हैं.

हाल-फिलहाल विश्व के प्रसिद्ध पुस्तकालयों में भारत के किसी पुस्तकालय का फिलहाल नाम मौजूद नहीं है, लेकिन एक समय था जब 12वीं शताब्दी के आसपास नालंदा यूनिवर्सिटी पूरे विश्व में शिक्षा के केंद्र के रूप में जानी जाती थी. कहते हैं तत्कालीन समय में यहां 9 मंजिला लाइब्रेरी होती थी जिसे 1199 में बख्तियार खिलजी नामक लुटेरे ने आग के हवाले कर दिया था. आग लगने के बाद यह लाइब्रेरी महीनों तक जलती रही थी, लेकिन आग बुझी नहीं थी.

फ़िलहाल, दी नेशनल लाइब्रेरी, कोलकाता के साथ-साथ दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी और कुछ और पुस्तकालय अवश्य ही देश में प्रसिद्ध हैं, किन्तु बात जब वर्ल्ड-स्टैण्डर्ड की हो रही हो तो एक लम्बा सफर तय किया जाना बाकी नज़र आता है.

जाहिर तौर पर भारत में भी शिक्षा की स्थिति पर काम किए जाने की जरूरत है और अगर पुनः हम विश्व में अपना स्थान कायम करना चाहते हैं तो हमें इस बात के लिए प्रयासरत होना चाहिए और किताबें इसका सबसे बेहतर जरिया बन सकती हैं.