एक किताब को दोस्त बनाना कितना फायदेमंद है?

कहा जाता है कि किताब किसी भी मनुष्य का सच्चा दोस्त होती है. वह आपको कभी भी मिसगाइड नहीं करती है. वह ना आपको अत्यधिक उत्तेजित करती है और ना ही आपके कॉन्फिडेंस को कम ही होने देती है. बिल्कुल किसी आईने की तरह वह सही परिस्थिति को आपके सामने रखती है.

समाज बदला जरूर है और टेक्नोलॉजी के नए-नए एस्पेक्ट भी सामने आए हैं, लेकिन आज भी किताब पढ़ने का कोई विकल्प नहीं है. आपको बता दें कि मशहूर दार्शनिक प्लेटो ने एक ऐसे समाज की परिकल्पना की थी जिसमें अत्यधिक पढ़ने और इसमें रूचि रखने वालों को ही राजा बनने की संकल्पना की गयी थी. जाहिर तौर पर पढ़ने और पढ़ाने की अहमियत सामान्य सोच से कहीं ज्यादा मायने रखती है.

इस क्रम में किताब पढ़ने के और भी कई फायदे हैं जिन्हें समझना बेहद दिलचस्प रहेगा…

बदलते समय के साथ अक्सर लोगों को भूलने की बीमारी हो जाती है. पर क्या आपको पता है कि अगर आप किताब पढ़ने की आदत विकसित करते हैं तो इस समस्या से निजात पाने में आपको खासी मदद मिलती है. नेशनल अकैडमी आफ साइंस द्वारा किये गए एक शोध में यह बात सामने आई है कि अल्जाइमर यानी याददाश्त की बीमारी पढ़ने की आदत से दूर हो सकती है. बढ़ती उम्र में भी जो लोग किताबों का सहारा नहीं छोड़ते हैं, वह इस बीमारी से बचे रह सकते हैं.

इसी प्रकार एक अन्य रिपोर्ट जो नेशनल एंडोमेंट फॉर आर्ट्स द्वारा किया गया है, उसमें यह बात सामने आई है कि किताब पढ़ने वाले लोग अपनी रिस्पांसिबिलिटीज के प्रति ज्यादा सजग होते हैं. जाहिर तौर पर विभिन्न दृष्टि की किताबें पढ़ने के कारण वह ज्यादा सांस्कृतिक भी होते हैं, कल्चरल होते हैं.

आप यह जानकर भी हैरान रह जाएंगे कि मात्र 6 मिनट की पढ़ाई करने से आप अपने तनाव को 68 परसेंट तक कम कर सकते हैं. यह एक शोध है जो 2009 में किया गया था. आज के समय में जिस प्रकार से तनाव एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आ रहा है वैसे में पढ़ने की आदत किसी के लिए भी रामबाण हो सकती है.

किताबें पढ़ने के लिए कई लोग यह बहाना बना सकते हैं कि उनके पास समय नहीं होता है. जी हां! यह बहाना ही तो है…

सच बात तो यह है कि वर्तमान समय में एक व्यक्ति स्मार्टफोन के चक्कर में अपना उपयोगी समय बर्बाद कर देता है. इस दौरान वह ना कोई जानकारी इकट्ठी करता है और ना ही जानकारी देने का प्रयत्न करता है. बल्कि सिर्फ और सिर्फ ब्राउज़िंग करके और सोशल मीडिया के जाल में फंस कर प्रत्येक दिन काफी बड़ी मात्रा में अपना समय बर्बाद करता है.

ऐसी स्थिति में अगर आप किताबों का सहारा लेते हैं, तो निश्चित रूप से आप उन्हें पढ़ने का समय निकाल सकते हैं. इसके लिए आपको कुछ ज्यादा नहीं करना है, बस जो चीजें आपका ध्यान भटकाती हैं, उनसे दूर रहना है. जैसे स्मार्टफोन, गेम्स, टेलीविज़न, बेवजह की गपशप इत्यादि से आपको थोड़ा बचना पड़ता है.

वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में साइकोलॉजी डिपार्टमेंट द्वारा एक्सपेरिमेंट किया गया था. इसमें दो भूखे लोगों की टीम को एक पहेली सॉल्व करने के लिए दी गई. दोनों अलग-अलग थे. एक टीम के सामने बिस्किट रखा गया जबकि दूसरी टीम के सामने कुछ नहीं रखा गया.

जिनके सामने बिस्किट रखा गया था, उन्हें यह वार्निंग दी गई थी कि बिना पहेली सुलझाए वह बिस्किट नहीं खा सकते. जाहिर तौर पर आप इसके परिणाम का अंदाजा लगा सकते हैं. आपको बता दें कि जिनके सामने कुकीज नहीं रखी गई थी, उन्होंने पहेली को जल्दी हल किया. मतलब साफ था कि ध्यान भटकाने वाली चीजों से वह बचे रहें.

एक दिलचस्प ट्रेंड बताएं आपको कि लोग आजकल स्मार्टफोन और दूसरी डिवाइस पर भी किताब पढने लगे हैं, पर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज पर किताबें पढ़ने की सलाह विशेषज्ञ नहीं देते हैं.
मतलब साफ़ है और वह यह है कि प्रिंट बुक ज्यादा कारगर है. इससे आपका ध्यान कम भटकता है और आप अपनी जिम्मेदारियों के प्रति ज्यादा सजग रह पाते हैं. जाहिर तौर पर प्रिंट बुक में आपके पास सिर्फ पढ़ने का विकल्प होता है, जबकि इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से अगर आप किताब पढ़ते हैं तो उसमें कई सारे ऑप्शन सोते हैं जो आपका ध्यान भटका सकते हैं.

हालाँकि, किंडल पेपरवाइट जैसी डिवाइस सिर्फ और सिर्फ बुक-रीडिंग के लिए ही उपलब्ध है, किन्तु बावजूद इसके प्रिंट बुक का कोई तोड़ नहीं है.

ऐसे में आपको पढ़ने की आदत का विकास करने में जरा भी संकोच नहीं करना चाहिए और यही वह चीज है जो आपकी क्षमता को मजबूत कर सकती है और सकारात्मक दिशा दे सकती है.

आप क्या कहते हैं इस बारे में…?