बच्चों का यौन शोषण: पेरेंट्स की सजगता बेहद जरूरी

बच्चों का यौन शोषण आज देश भर में बड़ी समस्या बन चुका है. जरा सोचिए, यह एक ऐसा अपराध है जिस के साए में दबा आपका मासूम आजीवन इससे उबर नहीं पाता है!

फिर उसका मन न पढ़ाई में लगता है और ना ही किसी दूसरी एक्टिविटी में, बल्कि वह खुद को प्रताड़ित ही महसूस करता रहता है. ऐसे में आपका बच्चा हीन-भावना का शिकार हो जाता है और समाज में सर उठा कर चलने में हमेशा-हमेशा के लिए शर्म महसूस करता है.

बच्चों के प्रति यौन-अपराधों की शिकायत बेहद तेजी से आगे बढ़ रही है. एनसीआरबी की एक रिपोर्ट के अनुसार बच्चों के प्रति यौन-अपराधों में 151 फ़ीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज हुई है और यह बुराई भारत के तकरीबन सभी प्रदेशों में फैली हुई है.

यह तो वह शिकायतें हैं जो बच्चों के मां-बाप सामने लाते हैं, किंतु बहुत सारी शिकायतें ऐसी भी होती हैं, जो सामने ही नहीं आ पाती हैं.

यह समस्या ऐसी है जिसके बारे में भारतीय समाज में जागरूकता की बड़ी कमी है. मां-बाप इस बारे में सोचने-समझने और संवाद करने में संकोच महसूस करते हैं और यह संकोच कब लापरवाही में बदल जाता है, इसका पता जब तक चलता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है.

जाहिर तौर पर यह कोई छोटी समस्या नहीं है. आप अखबार उठा कर देख लें, आप इंटरनेट पर सर्च कर लें, ऐसी एक नहीं, सैकड़ों-हजारों ऐसी समस्यायें मीडिया में तैरती मिल जाएंगी. इन खबरों में खराब और दूषित मेंटालिटी के लोगों द्वारा बच्चे बुरी तरह से प्रताड़ित किए गए होते हैं.

ऐसा भी नहीं है कि आपके बच्चे का यौन-शोषण केवल बाहर के अनजान लोगों द्वारा ही किया जाता है, बल्कि रिपोर्ट्स में ऐसी बात भी सामने आई है कि जान-पहचान वाले लोग इस तरह की घटिया हरकत कहीं ज्यादा करते हैं.

जैसे आपके परिवार में ही कोई कजन हो सकता है जो बच्चे का यौन-शोषण कर रहा हो, इसी तरह बहुत मुमकिन है कि स्कूल में टीचर द्वारा बच्चे का यौन शोषण किया जा रहा हो, या आप जहां ट्यूशन भेजते हों, वहां इस तरह की हरकत हो रही हो, कोई आपका पड़ोसी हो सकता है, आपके बच्चे की देखभाल करने वाला कोई नौकर या नौकरानी हो सकती है.

यह तमाम लोग आपके मासूम के साथ यौन-कुचेष्टा की कोशिश कर सकते हैं. बच्चों के प्रति इस तरह के अपराध में गलत तरीके की बातें करना, गलत तरीके से छूना, अश्लील सामग्री दिखलाना या ऐसी ही दूसरी गतिविधियां शामिल हो सकती हैं.

ऐसे में आप की सजगता बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट हो जाती है और इसके लिए सबसे सरल माध्यम यह है कि आप अपने बच्चे से बात करें… लगातार! बच्चे से आपका संवाद जितना बेहतर होगा, उतना ही आप उसके बारे में समझ पाएंगे और उसको समझा पाएंगे कि उसे अनजान लोगों से किस प्रकार का व्यवहार करना चाहिए!
गुड टच, बैड टच क्या होता है… गलत बातें करने वाले लोगों को कैसे पहचानें, यह सब आपको अपने नौनिहाल को बतलाना पड़ेगा, सिखलाना पड़ेगा!

इसके लिए आपको बच्चे के बिहेवियर पर भी ध्यान देना चाहिए, क्या आपका बच्चा खोया-खोया रहता है? क्या वह किसी खास व्यक्ति के पास जाने से घबराता है? क्या आप उसे ट्यूशन भेजते हैं, तो वहां जाने में असामान्य रूप से वह संकोच करता है?
अगर ऐसे लक्षण आपको दिखते हैं, तो आप उसके व्यवहार का कारण जानने की चेष्टा करें.

इसी प्रकार अगर बच्चा कहीं जाता है और एक पैटर्न के हिसाब से वह प्रतिदिन देर से आता है तो आप उसका कारण अवश्य जानिए. इसके कारण कई बार असामान्य, मगर बेहद सूक्ष्म होते हैं. आप ध्यान देंगे तो उस असामान्य करान को अवश्य ही समझ पाएंगे.

इसके अतिरिक्त अगर दुर्भाग्य से ऐसी कोई दुर्घटना होती है, आपके बच्चे के साथ यौन-शोषण होता है तो आप उसे कतई न छिपाएं! इससे बच्चे के मन में हमेशा के लिए हीन-भावना घर कर लेती है और जो व्यक्ति अपने प्रति हीन-भावना पाल लेता है, वह सालों-साल या फिर ज़िन्दगी भर उससे उबर नहीं पाता है.
इस हेतु आपको उचित मंच पर आवाज उठाना चाहिए और अपने बच्चे के लिए संघर्ष करने से हिचकिचाना नहीं चाहिए. इससे न्याय मिले ना मिले, किंतु बच्चे का कॉन्फिडेंस अवश्य ही वापस आ सकता है.

वैसे भी 2012 में पास्को एक्ट बना था, जो बच्चों को छेड़खानी, बलात्कार, दूसरे कुकर्मों से सम्बन्धित मामलों से सुरक्षा देता है. इसमें 7 साल के लिए उम्र कैद और पैसों का जुर्माना लगाया जाता है. इसलिए अगर आप जागरूक होंगे तो आपको न्याय अवश्य मिल सकता है.

तो सजग रहना चाहिए, सतर्क रहना चाहिए और अपने बच्चे से लगातार संवाद बनाए रखना चाहिए, क्योंकि यही एक रास्ता है जो आपको, आपके बच्चे को समाज में मजबूती से खड़ा होने का साहस प्रदान कर सकता है.

बच्चों के यौन-शोषण के प्रति आपका क्या सोचना है, कमेन्ट-बॉक्स में बताएं.