क्या आपका बच्चा होमवर्क नहीं कर रहा है?

सच कहा जाए तो बच्चों को होम-वर्क कराना दिन पर दिन सरदर्द बनता जा रहा है. खासकर शुरुआती क्लासेज में बच्चे के पेरेंट्स उसके गृह-कार्य को लेकर न केवल परेशान रहते हैं, बल्कि इस हेतु तमाम जतन भी करते हैं.

कुछ बच्चे प्राकृतिक रूप से पढ़ाई को लेकर सजग होते हैं, तो इससे पेरेंट्स का काम ज़रूर आसान हो जाता है, पर सच कहा जाए तो अधिकतर बच्चे होमवर्क और पढ़ाई से घबराते ही हैं.
ऐसे में कोई माँ या बच्चे का पिता करे तो क्या करे?

कई अभिभावक तो स्कूल की शिकायतों से बचने के लिए अपने बच्चों का होमवर्क खुद ही करने कि बड़ी गलती करते रहते हैं, क्योंकि इसके नुक्सान से वह अनजान होते हैं.
आखिर यह सब कोई एक दिन की प्रक्रिया तो है नहीं कि आप उसे एक झटके में पूरा कर देंगे, बल्कि यह प्रश्न ताउम्र का होता है. अगर आपका बच्चा खुद होमवर्क करना नहीं सीखेगा, तो आप उसे भला कब तक अपना सहारा देते रहेंगे?

अगर वास्तव में आप अपने नौनिहाल में सुधार चाहते हैं तो, आपको कई बातों पर क्रमवार गौर करना होगा.

सेल्फ-मोटिवेशन

सबसे पहले बच्चे में सेल्फ-मोटिवेशन आवश्यक है. अतः होमवर्क कराने के लिए खुद उसे प्रेरित करें और अगर वह अपना टाइम टेबल सेट कर के कार्य करता है तो यह आदर्श स्थिति है.
कई बार पेरेंट्स अपने बच्चे पर अपना टाइम टेबल थोपते हैं, लेकिन जब बच्चा खुद अपना टाइम टेबल बनाएगा तो बहुत मुमकिन है कि वह इसे गंभीरता से लेगा.

उस समय-सारिणी में बच्चे के खेलने-कूदने से लेकर घूमने, टेलीविजन देखने एवं तमाम दूसरी एक्टिविटी शामिल करने को तरजीह दें.
इसमें होमवर्क के समय आपको सावधान रहते हुए अपने वार्ड को याद दिलाना है कि अपने बनाये गए टाइम टेबल पर वह अमल करे.

ध्यान रखें कि टाइम टेबल लॉजिकल रहे. मतलब, पढाई-मनोरंजन और आराम का समय वैज्ञानिक दृष्टि से एडजस्ट रहना आवश्यक है.

आपका ध्यान देना आवश्यक है

टाइम टेबल बच्चे द्वारा निर्माण करने का यह कतई मतलब नहीं है कि आप अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लें.
आप ज्योंही निश्चिन्त होते हैं, त्यों ही आपका बच्चा लापरवाही करने लगता है या खेल में व्यस्त हो जाता है.
यह कोई एक दिन का कार्य भी नहीं है कि आप बताकर निश्चिन्त हो जायेंगे, बल्कि प्रतिदिन आपको इस बारे में जिम्मेदारी से पेश आना पड़ेगा.

बच्चे की टालमटोल की आदत पर आप विशेष ध्यान रखें, क्योंकि यही एक जिम्मेदारी है, जो आपके बच्चे को होम वर्क करने की स्थाई आदत की तरफ ले जाएगी.

बच्चों का होमवर्क खुद कभी न करें.

जैसा कि ऊपर बताया है कि मां-बाप खुद ही अपने बच्चों का होमवर्क करने लगते हैं. ऐसी स्थिति में आप को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि सिर्फ खानापूर्ति करने से आपका बच्चा मजबूत नहीं होगा और उसकी नींव कमजोर ही रह जाएगी.
अब किसी मकान की नींव ही कमजोर होगी तो उस पर कितनी मंजिलें खड़ी हो सकेंगी भला?

बच्चों का होमवर्क कराते हुए यह भी नज़र रखें कि कहीं वह रट्टू तोता तो नहीं बन रहा है, बजाय कि चीजों को समझने पर फोकस करने के.

पैरंट-टीचर मीटिंग में अपडेट रहें

इसे कतई मिस न करें. लगातार उसकी डायरी चेक करें और उसमें लिखे कमेंट को अनदेखा करने कि भूल न करें.
आप अपने टीचर से नियमित संपर्क बनाये रहें, क्योंकि तभी आप जान पाएंगे कि आपको अलग स्टेप क्या लेना है.

खुद भी संयम करें.

होम वर्क कराते समय आपको खुद भी कई आदतों से दूर रहना होगा.
कई लोग अपने बच्चे को होम वर्क करने का निर्देश दे तो देते हैं, किन्तु खुद टेलीविजन या मोबाइल में लग जाते हैं.

निश्चित तौर पर आपके बच्चे का ध्यान डायवर्ट होता है. क्या आप भी उन पेरेंट्स में हैं, जो बच्चों का होम वर्क कराते हुए अक्सर अपने फोन में बिजी हो जाते हैं?
क्या फिर भी आप अपने बच्चे के सजग होने की उम्मीद करते हैं?

अगर आप इन तमाम बातों को ध्यान में रखते हैं तो कोई कारण नहीं है कि आपका बच्चा जागरूकता के साथ न केवल होम वर्क करेगा, बल्कि आने वाले दिनों में आपका नाम भी रौशन करेगा.

कमेंट-बॉक्स में अपने सुझाव ज़रूर बताएं.