बच्चे का ‘व्यक्तित्व विकास’ कैसे करें?

किसी भी व्यक्ति के लिए उसके अपने बच्चे का डेवलपमेंट सबसे ज्यादा मायने रखता है. वह डेवलपमेंट अगर चहुमुंखी होगा तो फिर सोने पर सुहागा!
पर क्या वाकई व्यक्तित्व स्वयं ही विकसित हो जाता है या फिर हमें कुछ बातों को ध्यान में रखना पड़ता है?
यह एक ऐसा प्रश्न है जिससे प्रत्येक मां-बाप जूझता है…

इसके लिए कई लोग प्रयास भी करते हैं और कई सारे फार्मूले आजमाये जाते हैं, किंतु वह फार्मूले कितने सफल होते हैं, कितने असफल होते हैं, यह आपको अपने बच्चे के व्यवहार से पता चल जाता है.

अगर साइकोलॉजिस्ट जरी वैकॉफ की किताब गेटिंग योर चाइल्ड फ्रॉम नो टू यश का रेफरेंस लें, तो उसमें वह लिखते हैं कि 8 साल की उम्र तक आपके बच्चे की पर्सनालिटी में जो बातें निहित हो जाती हैं, वही बातें आगे तक बनी रहती हैं.

इसीलिए 8 साल तक अपने बच्चे की परवरिश का खास ध्यान रखना प्रत्येक मां-बाप का कर्तव्य है. अब प्रश्न उठता है कि बच्चे के व्यवहार का ध्यान कैसे रखा जाना चाहिए?
इसमें कई बातें शामिल होती हैं, जैसे क्या आपका बच्चा कुछ ज्यादा ही नाराज होता है? क्या वह हिंसक है? क्या वह शर्मीले और अंतर्मुखी स्वभाव का है? क्या वह आपसे बातचीत करने में इंटरेस्ट नहीं लेता है? अगर इन सारी चीजों को आप ध्यान से देखेंगे तो आप समझ सकते हैं कि आपके बच्चे के व्यवहार के किस पक्ष पर कार्य करने की आवश्यकता है?

बच्चों से संवाद करना भी आवश्यक है. खासकर, आधुनिक युग में भी अगर आप बच्चे से संवाद नहीं करेंगे तो बच्चा आपसे धीरे-धीरे दूर होता चला जाएगा और आपसे बहुत आवश्यक बात भी नहीं कह सकेगा!

बच्चों को डामिनेट करने की बजाय आप उससे संवाद करें. किंतु संवाद का तात्पर्य यह नहीं है कि आप उसकी किसी भी बात को मान लें, चाहे वह जायज़ हो या नाजायज हो. इसकी बजाय संवादी होने का तात्पर्य यह है कि समझ सके जाने वाले तर्क के साथ एक गार्जियन की तरह बात करें, समझाएं और अगर आवश्यक होता है तो कड़ाई से भी पेश आएं.

हालांकि पनिशमेंट देने से बच्चों की पर्सनालिटी उभरने की बजाय दब जाती है, किंतु सच कहा जाए तो कभी-कभी इसके बिना काम भी नहीं चलता है. हाँ! अगर पनिशमेंट देना आवश्यक ही है तो इसमें आप अपने दिमाग पर काबू रखकर उम्र के हिसाब से ही पनिशमेंट दें, ताकि उसके भीतर आत्म जागृति उत्पन्न हो, न कि वह दब्बू हो जाए.

सजा की तरह आपको बच्चे को पुरस्कृत भी करना चाहिए. जैसे अगर आपका बच्चा कुछ अच्छा करता है तो उसे आप कोई पढ़ाई की या दूसरी ऐसी चीज जो उसके लिए उपयोगी हो, उसे पसंद हो, गिफ्ट कर सकते हैं. ध्यान रखिये, प्रेरणा के लिए पुरस्कार बेहद महत्वपूर्ण होता है.

सबसे महत्वपूर्ण चीज यह है कि बच्चा आपके सिखलाने से कम सीखता है, किंतु आपके व्यवहार से सबसे ज्यादा सीखता है. एक मां-बाप के तौर पर अगर आप खुद घर में झूठ बोलते हैं, हिंसा करते हैं तो आपका बच्चा भी उस दिशा में बढ़ने लगेगा.
इसी तरह अगर आप आलस नहीं करते हैं, अगर तमाम काम नियमित समय पर करते हैं, अगर घर में आपने बढ़िया वातावरण बना के रखा है, तो कोई कारण नहीं है कि आपके बच्चे के ऊपर उस सकारात्मक माहौल का असर ना पड़े.

एक बात बड़ी स्पष्ट है कि लोगों का यह समझना होगा कि वह जो कहते हैं उनके बच्चे वैसा नहीं करते हैं और न करेंगे, बल्कि आप जो करते हैं बच्चों के व्यक्तित्व में वही बातें बहुतायत में नजर आती हैं.

बच्चों के व्यक्तित्व विकास के लिए आपको सोशल चीजों की ओर भी काफी ध्यान देना चाहिए. जैसे, परिवार में मेलजोल अक्सर बच्चों के पर्सनालिटी डेवलपमेंट में सकारात्मक भूमिका निभाता है. तमाम रिश्ते जिसमें चाचा-चाची, भाई-बहन इत्यादि शामिल होते हैं, उनके साथ मेलजोल बच्चों के विकास में एक बड़ी भूमिका निभाता है.

इसी प्रकार पड़ोसियों से आपका बेहतर संबंध आपके बच्चे को एक अच्छा भविष्य देने में निश्चित भूमिका निभाता है.

कुछ और बातों की ओर ध्यान देना भी आवश्यक है, जैसे बच्चा स्कूल में जाता है और वहां उसका व्यवहार कैसा रहता है, इस बात के प्रति सजगता आपके बच्चे के विकास में सकारात्मक भूमिका निभाती है. पेरेंट्स-टीचर मीटिंग और बच्चों की दूसरी गतिविधियों के प्रति आप की सजगता आपके बच्चे के व्यक्तित्व का अनुपम विकास करती है, इस बात में दो राय नहीं है.

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