एग्जाम के समय पेरेंट्स को क्या करना चाहिए?

कोई भी व्यक्ति यह चाहता है कि उसका बच्चा एग्जाम में अव्वल नंबर लेकर आये. इस चाहत में कोई बुराई भी नहीं है, लेकिन मुश्किल तब हो जाती है, जब बिना अपने बच्चे की क्षमता का आंकलन किए हम इस चाहत को अपनी जिद्द बना लेते हैं.

अगर बच्चे के अंदर क्षमता है, तो भी उसे उचित ट्रेनिंग देना उतना ही इंपॉर्टेंट है. अगर आप उचित ट्रेनिंग नहीं देते हैं तो आपका बच्चा चाहे जितना क्षमतावान हो, वह परीक्षा में बेहतर मार्क्स नहीं ला सकता.

खासकर परीक्षा के दिनों में तो यह समस्या काफी ज्यादा बढ़ जाती है. पेरेंट्स का दबाव परीक्षा के दबाव से अतिरिक्त होता है और इसे लेकर कई बार बच्चे डिप्रेशन तक में चले जाते हैं. इतना ही नहीं, कई बार वह अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ कर बैठते हैं.

ऐसे में आवश्यक है कि एक जागरूक पेरेंट्स होने के नाते आपको महत्वपूर्ण चीजों का ध्यान रखना चाहिए, जिससे आपका बच्चा बेहतर मार्क्स लाने की ओर बढ़े-

मोटिवेशन और उत्साहवर्धन

यह एक ऐसा मंत्र है, जिसमें आपको कुछ भी देना नहीं पड़ता है, लेकिन इस मंत्र के सहारे दुनिया जीती जा सकती है. दुनिया में आखिर क्या असंभव है? अगर आप अपने बच्चों को इस मंत्र का यकीन दिला दें तो वह अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित हो जायेंगे. इसमें बच्चे को प्रयास करने पर ज्यादा ज़ोर दें, बजाय कि परिणामों की चिंता करने के!

गीता में जिस प्रकार श्रीकृष्ण भगवान ने कहा है कि कर्म करो फल की इच्छा मत करो, ठीक उसी प्रकार से आप अपने बच्चे को मोटिवेट कर सकते हैं कि तुम बेहतर से बेहतर प्रयास करो, अलग ढंग से प्रयास करो और परिणाम की इतनी चिंता मत करो. जाहिर तौर पर इससे बच्चा बेहतर करने के लिए प्रेरित होगा, बजाय परिणामों का अतिरिक्त भार लेने के.

तनाव मुक्त रहना आवश्यक है

पेरेंट्स के तौर पर आपको यह भी ध्यान रखना चाहिए कि आपका बच्चा परीक्षा के दौरान तनाव मुक्त रहे, क्योंकि परीक्षा के समय तमाम चीजें रिवाइज करनी होती हैं, कंठस्थ करनी होती है, किंतु अगर आपका बच्चा तनाव में होता है तो वह अपने शरीर की देखभाल नहीं कर पाता है.
कई बार तो दिमागी रूप से भी बच्चा इस तरह के तनाव को झेलने में सक्षम नहीं होता है और नतीजा यह होता है कि अच्छा करने की बजाय आपका बच्चा स्वाभाविक प्रदर्शन भी नहीं कर पाता.

इसीलिए उसे तनाव से दूर रहने के तरीके सुझाएं. अगर आपका बच्चा कहीं उलझन महसूस करता है तो उससे संवाद करने को तैयार रहें. लगातार पढ़ने की वजह से अगर वह बोर महसूस करे तो थोड़ा खेल-कूद भी जरूरी है और परिवार में घुलने-मिलने से आपका बच्चा तनाव मुक्त रह कर परीक्षा की तैयारी कर पाता है, इस बात में दो राय नहीं.

पढ़ाई में मन नहीं लगना: कारण एवं निवारण

ध्यान रखने वाली बात यह भी है कि अगर आपका बच्चा क्रमवार ढंग से साल भर पढ़ाई में मन नहीं लगा रहा था तो अचानक परीक्षा के दौरान उस पर प्रेसर आने से उसका मन इससे और ज्यादा उचट सकता है.

अगर आपके बच्चे के साथ भी यही समस्या हो रही है, उसका मन पढ़ाई में नहीं लगता है तो इसका बड़ा कारण यही होता है कि उसने साल भर तैयारियां नहीं की हैं, बल्कि साल भर तक अकादमिक तैयारियों को अनदेखा ही किया है. अगर ऐसी स्थिति भी आती है तो आप गाइड की मदद लेकर बच्चे को पढ़ाई की तरफ मोड़ने का प्रयत्न कर सकते हैं. अगर पूरी किताब या पूरा सिलेबस उसे तैयार नहीं है तो कुछ चुनिंदा हिस्सों को जो इंपॉर्टेंट हो सकते हैं, जिसमें आपके बच्चे की रूचि दिखे, उसे तैयार करने पर जोर दे सकते हैं और इस तरीके से धीरे-धीरे गाड़ी पटरी पर आ सकती है.

खानपान पर ध्यान देना आवश्यक है

आपका बच्चा जंक फूड से दूर रहे और परीक्षा के दौरान हल्का और पौष्टिक खाना खाए, इस बात का ध्यान रखना आवश्यक है. ऐसा भी नहीं होना चाहिए कि लगातार पढ़ने कारण आपके बच्चे की नींद ही ना पूरी हो तो ऐसी स्थिति में बच्चे का मन पढ़ाई में और भी नहीं लगेगा और वह आलस का व्यवहार करेगा. पढ़ाई के लिए तरोताजा होना आवश्यक है.

पढ़ाई के लिए बच्चे का टाइम टेबल बनाना भी आवश्यक है, क्योंकि अलग-अलग विषयों को उचित टाइम न देने से मार्क्स खराब आने के चांस रहते हैं.
इसी के साथ घर में ठीक माहौल का होना आवश्यक है और परीक्षा दिलाने परीक्षा केंद्र तक जाकर आप उसे मोटिवेट करने का प्रयत्न कर सकते हैं.

कुछ और टिप्स की बात करें, तो-

कोशिश करें कि परीक्षा के दौरान आप अपने बच्चे के साथ भोजन करें. परिवार के लोगों से घुलने-मिलने पर आपका बच्चा थोड़ा बेहतर महसूस करेगा.
इसी प्रकार परीक्षा के दौरान बच्चों को अंधविश्वास से दूर रखने का प्रयत्न करें. जैसे बिल्ली का रास्ता काटना या शकुन के लिए दूसरी चीजें करना इत्यादि. इससे बच्चे में आत्मविश्वास की कमी आती है.
बच्चे की रुचि बनी रहे, इसके लिए कुछ क्रिएटिव तरीके अपनाये जा सकते हैं. जैसे खेल-खेल में नई चीजें याद करने में आप उसकी मदद कर सकते हैं.
बेहतर तयारी के लिए आप उसका मॉक टेस्ट ले सकते हैं, ओरल टेस्ट ले सकते हैं और इस तरीके से आपका बच्चा एक बेहतर एग्जाम के लिए तैयार हो सकता है.

यह ध्यान रखिए कि बच्चे के अंदर नकारात्मक सोच कतई न आये और वह खुद को कम न समझे. ऐसा भी उसे प्रतीत नहीं होना चाहिए कि कम मार्क्स आने पर आप उसके साथ खराब बर्ताव करेंगे. इसके लिए आपका बच्चे से संवाद करना ज्यादा आवश्यक है.

आप क्या कहते हैं?
एक पेरेंट्स को बच्चों के साथ एग्जाम के समय कैसा व्यवहार करना चाहिए. कमेंट-बॉक्स आपकी प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है.